Veer Ka Balidan Hindi Kahani: बाघ जतिन


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Bagh Jatin Ki Veerta Ki Kahani Comics


Bagh Jatin Hindi Story
बाघ जतिन हिंदी स्टोरी


भारत की आज़ादी के हेतु अनेक भारतीयों ने अपने प्राणों की बलि दी। ऐसे महान वीरों में बाघ जतीन एक हैं। इनका जन्म 1879 में बंगाल के एक गाँव में हुआ था।


'बाघ' का अर्थ शार्दूल होता है। यह उपाधि इन्हें कैसे प्राप्त हुई इसके पीछे एक कहानी है। एक दिन सवेरे एक बाघ ने जतीन के ही गाँव में उन पर हमला किया, जतीन ने उसे एक छोटे से चाकू से मार डाला। बाघ ने बुरी तरह से उन्हें घायल किया, फिर भी डाक्टरों के कथनानुसार वे अपने “आत्मबल 'के कारण जीवित रह सके।


जतीन का काम बाघ का वध करने से ही समाप्त नहीं हुआ। उन्हें अपने मातृ देश पर शासन करनेवाले ब्रिटीशों के साथ भी लड़ना पड़ा। स्वामी विवेकानंद तथा श्री अरविंद की राष्ट्रीय भावनाओं से उत्तेजित हो उन्होंने विदेशी शासकों के प्रति विद्रोह करने के लिए गुप्त रूप से युवकों को संगठित किया।


जतीन ने उन युवकों को लाठी चलाना, कसरत तथा बंदूक़ चलाना सिखाया । उन युवकों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने आप को आत्मसमर्पित किया। उनके गुप्त कार्यों से परिचित हो सरकार ने उनके नेता जतीन को गिरफ्तार किया।


ब्रिटीश सरकार ने जतीन को डराया, सताया, मगर उन्होंने कोई भी रहस्य प्रकट नहीं किया। तब उन्हें जमीन-जायदाद, धन और सुख का प्रलोभन दिखाया गया। इस पर क्रोधित हो जतीन ने “ मुंह बंद करों ” चिल्लाते हुए हाथ मेज़ पर दे मारा। मेज टूट गई।


आखिर उन पर कोई इलजाम लगा न पाये, इसलिए उन्हें रिहा किया गया  उन्होंने अपने अनुयायिकों को विद्रोह करने के लिए आयुध लाने यूरोप भेजा | जर्मनी ने मदद देने का आश्वासन दिया जतीन अपने तीन अनुचरों के साथ कटिटपड़ा जाकर बालासोर के निकट एक पुराने बंदरगाह के पास हथियार लानेवाले जर्मन जहाज का इंतजार करने लगे।


निचे दिए गये कॉमिक्स के रूप में इस कहानी को पूरा पढ़ें...

बाघ जतिन: देश भक्ति की कहानी को कॉमिक्स के रूप में पढ़ें 

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Bagh Jatin Desh Bhakti Hindi Comics Story


भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के वास्ते हुथियार लानेवाले जर्मन जहाज का दो ब्रिटीश जहाज़ों ने पीछा किया दुश्मन के हाथ फेसने के पहले जर्मन जहाज़ ने सभी हथियारों को समुद्र में गिरा दिया । जतीन ने यह समाचार सुनते ही कहा था-“इसका मतलब है कि हमें विदेशी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए


जतीन अपने आगे के कार्यक्रम का निर्णय कर न पाये थे, इस बीच कलकत्ते के गुप्तचरों ने उनके गुप्त ठिकाने का पता लगाया पुलिस जिस दिन जतीन तथा उनके अनुचरों को बन्दी बनाने वाली थी, उस दिन बारिश हो रही थी, फिर भी जतीन और उनके अनुचर साहस के साथ बचकर निकल गये।


पुलिस ने असफल होकर चिल्लाना शुरू किया-भयंकर लुटेरे भागते जा रहे हैं। उन्हें पकड़नेवालों को भारी इनाम दिया जाएगा। लेकिन वे चारों युवक छिपते, रेंगते, मनुष्यों से बचते बुधबलंग नदी तक पहुँचे


वहाँ के गाँववालों ने उन्हें देख लुटेरे समझा और चिल्लाना शुरू किया। फिर भी वे युवक अपनी हिम्मत हारे बिना बंदूक, बारूद, कारतूस आदि को उठाये नदी पार कर गये।


पुलिस तथा सेनिक भी जब वहाँ पहुँचे, तब एक मिट्टी के टीले पर बांबियों के पीछे से लड़ने को तेयार हो गये। अनेक घंटों तक लड़ाई होती रही। उन चारों युवकों की गोलियों से कई दर्जन सिपाही मारे गये । खून से लतपथ होकर भी उन युवकों ने हथियार नहीं फेंके। अंतिम कारतूस के चुकने तक लड़ते रहें।


अंत में जतीन पकड़े गये। मगर उसी रात को उनका देहांत हुआ । उन्होंने अपने को बंदी बनानेवालों से कहा-

"आप लोग मेरे अनुचरों को दण्ड न दीजिए। जो कुछ हुआ, उसका पूरा जिम्मेवार मैं हूँ।"

''इस पर पुलिस कमिश्नर चाल्स टिगार्ट ने जतीन की प्रशंसा करते हुए कहा था-

'समस्त भारतीयों में महान वीर को मैंने देखा है' ।"


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Team: The Hindi Story

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