राजकुमारी ताराबाई के जीवन पर आधारित सच्ची हिंदी कहानी | Tarabai

 

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Rajkumari Tarabai Ke Jivan Par Adharit Sacchi Ghatnaon ki Hindi Kahani

राजकुमारी ताराबाई

अपनी अवस्था से बढ़कर असाधारण साहस, वीरता तथा युक्ति का परिचय देकर ताराबाई नामक एक राजकुमारी ने अपने पिता के राज्य पर आक्रमण करके शासन करनेवाले विदेशी शासक का अंत किया था। यह उसी की कहानी है।


घोड़ा नामक राज्य का शासक राव सुर्तास था। उस राज्य पर लिल्ला नामक एक अफगान ने आक्रमण किया और क्रूरतापूर्वक शासन करने लगा। इस पर राव सुर्तास अरावली के पहाड़ों में भाग गया। उसकी पुत्री ताराबाई थी। वह बचपन से ही अपने पिता के मुख से अपने पुरखों के शौर्य एवं प्रताप की कहानियाँ सुना करती थी।


लिल्ला के क्रूर शासन से धोड़ा राज्य को मुक्त करने का राव सुर्तास ने काफी प्रयत्न किये, लेकिन आफगान लिल्ला के सैनिकों के आगे उसके सारे प्रयत्न असफल रहें।


एक विदेशी शासक के शासन में अपनी प्रजा की कठिनाइयों को देख राव सुर्तास का कलेजा दहक उठता था। ताराबाई अपने पिता की इस चिंता को देख व्यथित हो जाती|उसके मन में राज्य को वापस लेने का संकल्प दृढ़ होता गया। ताराबाई समस्त प्रकार की युद्ध विद्याओं में प्रवीण बन गई। घोड़े पर सवारी करते हुए वह बाण से अपने लक्ष्य को भेद सकती थी।


ताराबाई की सखियों को राजकुमारी का इस प्रकार पुरुषोचित विद्याओं का अभ्यास करना कदापि पसंद न था। वे ताराबाई से अकसर पूछा करती- ”युवक की भांति इस प्रकार खड़ग-चालन और धनुविद्याओं में समय काटने वाली तुम्हारे साथ कौन शादी करेगा?” इस पर वह जरा भी हताश हुए बिना जवाब दे देती-

“जो महान वीर है, वही मेरे साथ विवाह करने योग्य होगा।


निचे दिए गये कॉमिक्स के रूप में इस कहानी को पूरा पढ़ें...

राजकुमारी ताराबाई की हिंदी कहानी को कॉमिक्स के रूप में पढ़ें 

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Rajkumari Tarabai Hindi Comics Story




ताराबाई न केवल युद्ध विद्याओं में निपुण थी, बल्कि वह एक अनुपम रूपवती भी थी। उनके सौंदर्य के बारे में सुनकर कुछ राजकुमारों ने ताराबाई के साथ विवाह करने का प्रयत्त किया।मगर ताराबाई ने अपने पिता से स्पष्ट कह दिया- “मैं उसी युवक के साथ विवाह करूगी जो हमारे घोड़ा राज्य को शत्रु से मुक्त करेगा।


बलवान तथा 'क्रूर आफगान लिल्ला के साथ युद्ध में भिड़ना साधारण बात न थी। ताराबाई के निर्णय को सुनने पर अनेक क्षत्रिय युवकों ने उसके साथ विवाह करने का प्रयत्न त्याग दिया। पर मेवाड़ का राजकुमार पृथ्वीराज निडर तथा साहसी था। उसने राव सुर्तास के पास पहुँचकर बताया कि वह आफगान लिल्ला पर हमला करने को तैयार है।


ताराबाई ने पृथ्वीराज के शौर्य और साहस के बारे में सुन रखा था। उसने हठ किया कि लिल्ला पर होनेवाले आक्रमण में वह भी भाग लेगी। पृथ्वीराज ने मान लिया।पाँच सौ जबर्दस्त योद्धाओं को साथ वे दोनों घोड़ा नगर की ओर चल पड़े।


उस वक्त धोड़ा नगर में एक बड़ा उत्सव मनाया जा रहा था। लिल्ला अपने दुर्ग के महल पर बैठकर नीचे सैन्य प्रदर्शन करते सैनिकों को देख संतुष्ट हों सिर हिला रहा था। अपने सैंनिकों को दुर्ग के बाहर छोड़ ताराबाई और पृथ्वीराज उत्सव की भीड़ में मिले। वे जैसे ही लिल्ला के निकट पहुँचे। लिल्ला चिल्ला उठा-

“घोड़ों पर सवार ये नये लोग कौन हैं?” उसी वक्त ताराबाई का बाण और पृथ्वीराज के द्वारा फेंका गया भाला लिल्ला को जा लगे। उसने दूसरे ही क्षण अपने प्राण त्याग दिये। ताराबाई और पृथ्वीराज दुर्ग के द्वार की ओर तेजी से बढ़े।


लिल्ला के सेनिकों ने हालत भांप ली और उन्हें रोकने के लिए दुर्ग के पहरेदार को चेतावनी दी | पहरेदार ने उनके मार्ग को रोकने के लिए हाथी को खड़ा किया। आगे के घोड़े पर स्थित ताराबाई ने तलवार से हाथी की सूंड काट डाली हाथी भाग गया, फिर क्या था, दोनों दुर्ग के बाहर जाकर अपने संनिकों से जा मिले


आफगान सैनिकों ने उनका पीछा किया। ताराबाई ने अपने पाँच सौ सेनिकों के साथ उनका सामना किया | उस भयंकर युद्ध में आफगान सैनिक बुरी तरह से हार गये, इस प्रकार राव सुर्तास पुनः घोड़ा का राजा बना। ताराबाई और पृथ्वीराज का विवाह वैभवपूर्वक संपन्न हुआ।

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..... Rajkumari Tarabai ke jivan par adhaarit sacchi hindi kahani  Comics .....


Team: The Hindi Story

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