राजकुमारी ताराबाई के जीवन पर आधारित सच्ची हिंदी कहानी | Tarabai

 

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Rajkumari Tarabai Ke Jivan Par Adharit Sacchi Ghatnaon ki Hindi Kahani

राजकुमारी ताराबाई

अपनी अवस्था से बढ़कर असाधारण साहस, वीरता तथा युक्ति का परिचय देकर ताराबाई नामक एक राजकुमारी ने अपने पिता के राज्य पर आक्रमण करके शासन करनेवाले विदेशी शासक का अंत किया था। यह उसी की कहानी है।


घोड़ा नामक राज्य का शासक राव सुर्तास था। उस राज्य पर लिल्ला नामक एक अफगान ने आक्रमण किया और क्रूरतापूर्वक शासन करने लगा। इस पर राव सुर्तास अरावली के पहाड़ों में भाग गया। उसकी पुत्री ताराबाई थी। वह बचपन से ही अपने पिता के मुख से अपने पुरखों के शौर्य एवं प्रताप की कहानियाँ सुना करती थी।


लिल्ला के क्रूर शासन से धोड़ा राज्य को मुक्त करने का राव सुर्तास ने काफी प्रयत्न किये, लेकिन आफगान लिल्ला के सैनिकों के आगे उसके सारे प्रयत्न असफल रहें।


एक विदेशी शासक के शासन में अपनी प्रजा की कठिनाइयों को देख राव सुर्तास का कलेजा दहक उठता था। ताराबाई अपने पिता की इस चिंता को देख व्यथित हो जाती|उसके मन में राज्य को वापस लेने का संकल्प दृढ़ होता गया। ताराबाई समस्त प्रकार की युद्ध विद्याओं में प्रवीण बन गई। घोड़े पर सवारी करते हुए वह बाण से अपने लक्ष्य को भेद सकती थी।


ताराबाई की सखियों को राजकुमारी का इस प्रकार पुरुषोचित विद्याओं का अभ्यास करना कदापि पसंद न था। वे ताराबाई से अकसर पूछा करती- ”युवक की भांति इस प्रकार खड़ग-चालन और धनुविद्याओं में समय काटने वाली तुम्हारे साथ कौन शादी करेगा?” इस पर वह जरा भी हताश हुए बिना जवाब दे देती-

“जो महान वीर है, वही मेरे साथ विवाह करने योग्य होगा।


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Rajkumari Tarabai Hindi Comics Story




ताराबाई न केवल युद्ध विद्याओं में निपुण थी, बल्कि वह एक अनुपम रूपवती भी थी। उनके सौंदर्य के बारे में सुनकर कुछ राजकुमारों ने ताराबाई के साथ विवाह करने का प्रयत्त किया।मगर ताराबाई ने अपने पिता से स्पष्ट कह दिया- “मैं उसी युवक के साथ विवाह करूगी जो हमारे घोड़ा राज्य को शत्रु से मुक्त करेगा।


बलवान तथा 'क्रूर आफगान लिल्ला के साथ युद्ध में भिड़ना साधारण बात न थी। ताराबाई के निर्णय को सुनने पर अनेक क्षत्रिय युवकों ने उसके साथ विवाह करने का प्रयत्न त्याग दिया। पर मेवाड़ का राजकुमार पृथ्वीराज निडर तथा साहसी था। उसने राव सुर्तास के पास पहुँचकर बताया कि वह आफगान लिल्ला पर हमला करने को तैयार है।


ताराबाई ने पृथ्वीराज के शौर्य और साहस के बारे में सुन रखा था। उसने हठ किया कि लिल्ला पर होनेवाले आक्रमण में वह भी भाग लेगी। पृथ्वीराज ने मान लिया।पाँच सौ जबर्दस्त योद्धाओं को साथ वे दोनों घोड़ा नगर की ओर चल पड़े।


उस वक्त धोड़ा नगर में एक बड़ा उत्सव मनाया जा रहा था। लिल्ला अपने दुर्ग के महल पर बैठकर नीचे सैन्य प्रदर्शन करते सैनिकों को देख संतुष्ट हों सिर हिला रहा था। अपने सैंनिकों को दुर्ग के बाहर छोड़ ताराबाई और पृथ्वीराज उत्सव की भीड़ में मिले। वे जैसे ही लिल्ला के निकट पहुँचे। लिल्ला चिल्ला उठा-

“घोड़ों पर सवार ये नये लोग कौन हैं?” उसी वक्त ताराबाई का बाण और पृथ्वीराज के द्वारा फेंका गया भाला लिल्ला को जा लगे। उसने दूसरे ही क्षण अपने प्राण त्याग दिये। ताराबाई और पृथ्वीराज दुर्ग के द्वार की ओर तेजी से बढ़े।


लिल्ला के सेनिकों ने हालत भांप ली और उन्हें रोकने के लिए दुर्ग के पहरेदार को चेतावनी दी | पहरेदार ने उनके मार्ग को रोकने के लिए हाथी को खड़ा किया। आगे के घोड़े पर स्थित ताराबाई ने तलवार से हाथी की सूंड काट डाली हाथी भाग गया, फिर क्या था, दोनों दुर्ग के बाहर जाकर अपने संनिकों से जा मिले


आफगान सैनिकों ने उनका पीछा किया। ताराबाई ने अपने पाँच सौ सेनिकों के साथ उनका सामना किया | उस भयंकर युद्ध में आफगान सैनिक बुरी तरह से हार गये, इस प्रकार राव सुर्तास पुनः घोड़ा का राजा बना। ताराबाई और पृथ्वीराज का विवाह वैभवपूर्वक संपन्न हुआ।

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Team: The Hindi Story

Sardar Vallabhbhai Patel Hindi Comics | वल्लभभाई पटेल कहानी

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Sardar Vallabhbhai Patel ki Kahani Hindi Comics

Sardar Vallabhbhai Patel Hindi Comics
सरदार वल्लभभाई पटेल हिंदी कॉमिक्स 


आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक श्री वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्तूबर,1875 को गुजारत के करमसद नामक गाँव में हुआ था ।


बचपन से ही वल्लभभाई में दृढ लगन तथा विपत्तियों का सामना करने की अनुपम शक्ति विद्यमान थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अनुकूल न होने पर भी मेहनत के साथ पढ़कर न्याय शास्त्र के विशारद बने। वकालत करते उन्होंने जो धन कमाया, उससे अपने बड़े भाई विट्टल भाई को लंदन भेजकर बार-एट-ला पढ़ाया। वल्‍लभभाई ने भी बैरिस्टरी करके अहमदाबाद में वकालत शुरू की।


उन दिनों गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे । एक बार गुजरात क्लब में उनका भाषण हुआ। उस समय वल्लभभाई श्रोताओं में थे, पर वे गांधीजी के भाषण से विशेष प्रभावित नहीं हुए ।


इसके थोड़े दिन बाद गांधीजी ने गुजरात के चंपारण जिले में जन आन्दोलन चलाया। वहाँ के मजदूरों को उनके मालिक न्यायपूर्वक मजदूरी न देकर उनके श्रम को लूट रहे थे। उस आन्दोलन में गांधीजी ने जो लगन एवं साहस का परिचय दिया, उससे वल्लभभाई गांधीजी के प्रति आकृष्ट हुए। उसी समय खेड़ा जिले में भयंकर अकाल पड़ा। जनता भूख-प्यास से तड़प रही थी, फिर भी ब्रिटीश सरकार ने जबर्दस्ती कर वसूली करने का प्रयत्न किया। 


गांघीजी ने इसके विरुद्ध सत्याग्रह प्रारंभ किया। उस आन्दोलन में वल्लभभाई गांधीजी के दायें हाथ रहें। गांधीजी ने स्वयं कहा था- "वल्लभभाई की सहायता प्राप्त न होती तो यह आन्दोलन इस प्रकार सफल न होता ।” वे एक प्रतिभाशाली राष्ट्रीय आन्दोलन के निर्माता के रूप में विख्यात हुए।


खासकर उन्होंने 1920 के असहयोग आन्दोलन में अभूतपूर्व भूमिका अदा की। सरकार ने भूमि कर बढ़ाने का प्रयत्न किया, इस पर बारडोली के किसानों का संगठन करके वल्लभभाई ने उसका विरोध किया और विजय प्राप्त की। जनता ने उन्हें "सरदार वल्लभभाई" पुकारना प्रारंभ किया। 1931 में कराची में कांग्रेस का जो अधिवेशन हुआ उसके सरदार वल्लभ भाई अध्यक्ष रहें।


इसके थोड़े ही दिन बाद सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया और उन्हें एरवाड़ा के जेल में सोलह महीनों तक रखा। 1939 में जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तब ब्रिटीश सरकार ने भारत को उस युद्ध में शामिल किया। 


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Sardar Vallabhbhai Patel Hindi Comics Story



इससे हमारे नेता असंतुष्ट हुए और कांग्रेंस ने यह प्रस्ताव पास किया- “अगर युद्ध में हमारा सहयोग चाहते हैं तो पहले हमारे देश को स्वतंत्रता दीजिए।" साथ ही यह भी नारा लगाया कि ब्रिटीश सरकार को तत्काल हमारे देश को छोड़ चले जाना चाहिए ।


इस पर गांधीजी तथा सरदार वल्लभ भाई के साथ हमारे सभी प्रमुख नेता गिरफ्तार किये गये। जनता के विरोध को ब्रिटीश सरकार ने अत्यंत क्रूरतापूर्वंक दबाना चाहा। जनता पर निर्देयतापूर्वंक गोलियाँ चलाई गईं और सत्याग्रहियों को जेलों में नाना प्रकार से सताया गया।


भारतवासियों ने कई दशाकों तक स्वतंत्रता की जो लड़ाई लड़ी और जो त्याग किये, उनके परिणाम स्वरूप हमारे देश को 15 अगस्त, 1947 को आजादी प्राप्त हुई।


पं. जवाहर लाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने और सरदार पटेल उप प्रधान मंत्री हुए । भारत जब स्वतंत्र हुआ, उसी वक्त उसे अनेक विषम समस्याओं का सामना करना पड़ा। हमारे देश के अनेक प्रांतों में हिन्दू-मुस्लिम झगड़े हुए। गृहमंत्री के रूप में सरदार पटेल ने बड़ी दक्षता एवं निपुणता का परिचय देकर उन्हें नियंत्रण में रखा।


हमारे देश में छोटे-बड़े सभी मिलाकर लगभग छे-सौ देशी रियासतें थीं। इनमें से कुछ रियासतों के नरेशों ने ब्रिटीश सरकार के हटते ही स्वतंत्र होने के सपने देखे। किन्तु सरदार पटेल ने अपने दृढ़ निर्णय एवं कठिन कार्यक्रमों के द्वारा सभी रियासतों को रद्द करके उन्हें एक ही शासन के अंतर्गत प्रतिष्ठित किया।


इस प्रकार सरदार वल्लभभाई पटेल ने राष्ट्रीय जीवन के क्षेत्र में असंख्य विघ्न-बाधाओं का सामना कर विजय प्राप्त की। यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि भारत में उत्पन्न महान व्यक्तियों में सरदार पटेल एक हैं। उनका निधन "1950" में हुआ, पर देश की स्वतंत्रता के वास्ते सरदार पटेल ने जो त्याग किये, वे सदा सर्वदा स्मरणीय हैं ।

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Hindi Comics: प्रतिकार | हिंदी कहानी बदले की

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Badle Ki Hindi Kahani Comics: Pratikar
बदले की हिंदी कहानी कॉमिक्स: प्रतिकार

कई शताब्दियों के पूर्व उत्तर भारत के राज्यों पर विदेशी हमले हुआ करते थे। वे युद्ध अत्यंत भयंकर और अमानवीय होते थे। कभी कभी विदेशी हमलवार भारतीय दुर्गों को तोड़ देते, कभी उन्हें पराजित कर देते

बग्दाद में रहनेवाले खलीफ़ा के प्रतिनिधि के रूप में अल हजाज टर्की तथा ईरान देशों पर शासन करता था। उसने सिन्धु राज्य पर अपने सैनिकों द्वारा कई बार हमले कराये, पर हर बार वे पराजित होते रहें। उस वक्त सिंधु का राजा दहीर था

आखिर अल हजाज का दामाद महम्मद कासिम सेनापति बना । वह साहसी तथा मेघावी था।अनेक दिनों तक युद्ध करके वह सिंधु राजा के दुर्ग को भेद पाने में कामयाब हुआ।

उस युद्ध में सिन्धु के राजा व राजकुमार मारे गये। रानी और उनकी बहुंओं ने चिता में कूदकर आत्माहुति की ।

मगर राजा की दो सुंदर राजकुमारियाँ अग्नि की आहृति होने के पहले कासिम के हाथ में पड़ गईं।

सेनापति कासिम ने राजा का खजाना लूटा और अपने देश को लौट पड़ा दो राजकुमारियों को अपने साथ ले जाते हुए उसने अत्यंत गर्व का अनुभव किया

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Pratikar Badle Ki Hindi Comics Story



सेनापति कासिम ने राजकुमारियों को अपने ससुर अल हजाज के हाथ सौंप दिया, तो उसने उन राजकुमारियों को खलीफा के पास भेजा। खलीफा उनके सौंदर्य पर मुग्ध हुआ, उन्हें अपने महल में रखा और सेनापति को एक दूर प्रदेश का शासक नियुक्त किया

थोड़े दिन बाद खलीफ़ा ने घोषणा कि वह उन राजकुमारियों के साथ विवाह करने जा रहा है। इस पर राजकुमारियों ने कहा- ”हमारे साथ सेनापति ने रास्ते में ही शादी कर ली है!

यह सुनते ही खलीफ़ा को क्रोध आ गया। उसने दूर प्रदेश में रहनेवाले कासिम को बुला लाने के लिए अपने सेवकों को आदेश देते हुए कहा-

“ मैं उसे प्राणों के साथ नहीं बल्कि उसे मरा हुआ देखना ज्यादा पसंद करूँगा

ख़लीफ़ा का आदेश अमल किया गया कासिम का शव जब खलीफा के सामने लाया गया, तब राजकुमारियाँ बोलीं-

“ खलीफ़ा साहब ! सेनापति कासिम ने हमें स्पर्श तक नहीं किया था। हमारे पिता को मृत्यु तथा उनके वंश के निर्मुलन का हमने प्रतिकार लिया है, बस !”

धोखा खानेवाला खलीफ़ा चिल्ला उठा और राजकुमारियों का वध कर देने का आदेश दे दिया, इसके लिए वे दोनों पहले से ही तैयार थीं। और फिर बिना किसी गलती के कासिम को मरवा डालने की चिंता में खलीफा भी जल्द ही मर गया।

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Team: The Hindi Story

Veer Ka Balidan Hindi Kahani: बाघ जतिन


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Bagh Jatin Ki Veerta Ki Kahani Comics


Bagh Jatin Hindi Story
बाघ जतिन हिंदी स्टोरी


भारत की आज़ादी के हेतु अनेक भारतीयों ने अपने प्राणों की बलि दी। ऐसे महान वीरों में बाघ जतीन एक हैं। इनका जन्म 1879 में बंगाल के एक गाँव में हुआ था।


'बाघ' का अर्थ शार्दूल होता है। यह उपाधि इन्हें कैसे प्राप्त हुई इसके पीछे एक कहानी है। एक दिन सवेरे एक बाघ ने जतीन के ही गाँव में उन पर हमला किया, जतीन ने उसे एक छोटे से चाकू से मार डाला। बाघ ने बुरी तरह से उन्हें घायल किया, फिर भी डाक्टरों के कथनानुसार वे अपने “आत्मबल 'के कारण जीवित रह सके।


जतीन का काम बाघ का वध करने से ही समाप्त नहीं हुआ। उन्हें अपने मातृ देश पर शासन करनेवाले ब्रिटीशों के साथ भी लड़ना पड़ा। स्वामी विवेकानंद तथा श्री अरविंद की राष्ट्रीय भावनाओं से उत्तेजित हो उन्होंने विदेशी शासकों के प्रति विद्रोह करने के लिए गुप्त रूप से युवकों को संगठित किया।


जतीन ने उन युवकों को लाठी चलाना, कसरत तथा बंदूक़ चलाना सिखाया । उन युवकों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने आप को आत्मसमर्पित किया। उनके गुप्त कार्यों से परिचित हो सरकार ने उनके नेता जतीन को गिरफ्तार किया।


ब्रिटीश सरकार ने जतीन को डराया, सताया, मगर उन्होंने कोई भी रहस्य प्रकट नहीं किया। तब उन्हें जमीन-जायदाद, धन और सुख का प्रलोभन दिखाया गया। इस पर क्रोधित हो जतीन ने “ मुंह बंद करों ” चिल्लाते हुए हाथ मेज़ पर दे मारा। मेज टूट गई।


आखिर उन पर कोई इलजाम लगा न पाये, इसलिए उन्हें रिहा किया गया  उन्होंने अपने अनुयायिकों को विद्रोह करने के लिए आयुध लाने यूरोप भेजा | जर्मनी ने मदद देने का आश्वासन दिया जतीन अपने तीन अनुचरों के साथ कटिटपड़ा जाकर बालासोर के निकट एक पुराने बंदरगाह के पास हथियार लानेवाले जर्मन जहाज का इंतजार करने लगे।


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Bagh Jatin Desh Bhakti Hindi Comics Story


भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई के वास्ते हुथियार लानेवाले जर्मन जहाज का दो ब्रिटीश जहाज़ों ने पीछा किया दुश्मन के हाथ फेसने के पहले जर्मन जहाज़ ने सभी हथियारों को समुद्र में गिरा दिया । जतीन ने यह समाचार सुनते ही कहा था-“इसका मतलब है कि हमें विदेशी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए


जतीन अपने आगे के कार्यक्रम का निर्णय कर न पाये थे, इस बीच कलकत्ते के गुप्तचरों ने उनके गुप्त ठिकाने का पता लगाया पुलिस जिस दिन जतीन तथा उनके अनुचरों को बन्दी बनाने वाली थी, उस दिन बारिश हो रही थी, फिर भी जतीन और उनके अनुचर साहस के साथ बचकर निकल गये।


पुलिस ने असफल होकर चिल्लाना शुरू किया-भयंकर लुटेरे भागते जा रहे हैं। उन्हें पकड़नेवालों को भारी इनाम दिया जाएगा। लेकिन वे चारों युवक छिपते, रेंगते, मनुष्यों से बचते बुधबलंग नदी तक पहुँचे


वहाँ के गाँववालों ने उन्हें देख लुटेरे समझा और चिल्लाना शुरू किया। फिर भी वे युवक अपनी हिम्मत हारे बिना बंदूक, बारूद, कारतूस आदि को उठाये नदी पार कर गये।


पुलिस तथा सेनिक भी जब वहाँ पहुँचे, तब एक मिट्टी के टीले पर बांबियों के पीछे से लड़ने को तेयार हो गये। अनेक घंटों तक लड़ाई होती रही। उन चारों युवकों की गोलियों से कई दर्जन सिपाही मारे गये । खून से लतपथ होकर भी उन युवकों ने हथियार नहीं फेंके। अंतिम कारतूस के चुकने तक लड़ते रहें।


अंत में जतीन पकड़े गये। मगर उसी रात को उनका देहांत हुआ । उन्होंने अपने को बंदी बनानेवालों से कहा-

"आप लोग मेरे अनुचरों को दण्ड न दीजिए। जो कुछ हुआ, उसका पूरा जिम्मेवार मैं हूँ।"

''इस पर पुलिस कमिश्नर चाल्स टिगार्ट ने जतीन की प्रशंसा करते हुए कहा था-

'समस्त भारतीयों में महान वीर को मैंने देखा है' ।"


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Desh Bhakti Hindi Comics Story: Veer Vrishabh [Pdf]


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Veer Vrishabh Ki Kahani Pdf Comics

Desh Bhakti Ki  Hindi Kahani Comics: Veer Vrishabh
देश भक्ति की हिंदी कहानी कॉमिक्स: वीर वृषभ


पूर्वी तट पर कुजंग नामक एक छोटा- सा राज्य था। उसकी राजधानी प्रदीप नगरी थी। उसके शासक पराक्रमी थे, इस कारण वे वृषभ राजा नाम से प्रसिद्ध हुए । वहाँ की प्रजा का समुद्र तथा महा-नदी पर पूरा अधिकार था। राजा चन्द्रध्वज का दूसरा नाम वीर वृषभ था


ब्रिटीश लोगों ने क्रमशः भारत पर आक्रमण करते हुए इस छोटे राज्य पर भी अधिकार करना चाहा । इस पर राजा चन्द्रध्वज के नेतृत्व में कुजंग के नाविकों ने ब्रिटीश नौकाओं को खूब तंग किया


ब्रिटीश सेना ने कुजंग राज्य को घेर लिया । चन्द्रध्वज के सेनिकों के पास उत्तम प्रकार के आयुध न थे, फिर भी उन लोगों ने वीरतापूर्वक युद्ध किया; लेकिन अंत में वह दुर्ग ब्रिटीश सेना के अधिकार में चला गया


मगर राजा चन्द्रध्वज बन्दी न बना। थोड़े से अंगरक्षकों के साथ वह समुद्र के तटवर्ती घने जंगल में भाग गया।


ब्रिटिशियों ने कुजंग पर तो अधिकार कर लिया, लेकिन उन्हें उस प्रदेश में रहना कठिन हो गया। राजा चन्द्रध्वज को जैसे ही मौक़ा मिलता ब्रिटिशों के शिविरों में आग लगाकर उन पर हमला कर देते।


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Veer Vrishabh Desh Bhakti Hindi Comics Story


ब्रिटीशइयों ने समझ लिया कि चन्द्रध्वज को बन्दी बनाने पर ही उन्हें शांति मिल सकती है। एक दिन जंगल में चन्द्रध्वज अकेले ध्यान- समाधि में था, उस वक्त ब्रिटीशइयों ने गृप्तचरों की मदद से उसे बन्दी बनाया ।


बन्दी चन्द्रध्वज को कटक में लाकर महानदी के तट पर स्थित बाराबती के दुर्ग में क़ैद किया। लेकिन उसे बन्दी बनानेवाले उसके चारों तरफ़ घेरकर उसके मुंह से कहानियाँ सुन कर आनंदित होने लगे ।


अलावा इसके चन्द्रध्वज ने ब्रिटीश अधिकारियों को अनेक भारतीय खेल सिखाये | उन खेलों में उसे असाधारण प्रतिभा प्राप्त थी | इस प्रकार कई महीने बीत गये ।


एक दिन संध्या को महानदी पर एक सुंदर नौका दिखाई दी । उसमें डांड चलानेवाले कुल छत्तीस आदमी थे । उस नौका को देख गोरे साहब, उनकी पत्नियाँ और उनके बच्चे भी प्रसन्न हो उठे । ऐसी नौका को उन लोगों ने कभी न देखा था |

मलाह से पूछने पर उसने बताया कि वह नौका एक राजा की हैं, और राजा का देहांत हो गया है, इसलिए वह बिक्री के लिए तैयार है।


अधिकारियों ने मल्लाह से पूछा- "इस नौका का मूल्य क्या है?”

मल्लाह ने जवाब दिया-"इसका मूल्य तो कोई राजा ही बता सकते हैं, क्योंकि ऐसी वैभवपूर्ण नौकाएँ राजा लोग हीं बनवाते हैं।


उत्साह में आकर गोरे साहबों ने चन्द्रध्वज को दुर्ग से बाहर बुला लिया और उस नौका की जांच करने को कहा । इस पर चन्द्रध्वज नौका पर सवार हो गया |


फिर क्या था, एक साथ 36 डांडें चलीं। आँखें झपकने की देरी थी नौका नदी के मुहाने को पार कर नजरों से ओझल हो गई। तभी जाकर गोरे लोगों को असली बात का पता चला। इस प्रकार राजा चन्द्रध्वज को उसकी प्रजा तथा उसके मंत्री पट्टाजोशी ने ब्रिटिश कैड से मुक्त करवाया |


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Indian History Story Hindi: Panna Ka Tyag | हिंदी कॉमिक्स [PDF]


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Panna Ka Tyag Hindi Kahani Comics 

Indian History Story Hindi: Panna Ka Tyag
इंडियन हिस्ट्री स्टोरी हिंदी :पन्ना का त्याग


राजस्थान के सुप्रसिद्ध राज्य मेवाड़ पर 16 वीं सदी में राणा सांगा शासन करते थे। वे बड़े ही उदार तथा शूरवीर थे


दुर्भाग्य से उनके पुत्र उनके समान बन न पाये । रत्न नामक राजकुमार एक युद्ध में स्वर्गवासी बना | दूसरा राजकुमार विक्रमजित अपने पिता की मृत्यु के बाद राजा बना और भोग विलासी बन उसने अपने धन तथा समय का दुरुपयोग किया ।


मेवाड़ में अराजकता फैल गई। मुग़ल बादशाह उस राज्य को हड़पने की सोचने लगे। उस हालत में कुछ प्रमुख दरबारियों ने वनवीर को अपना सरदार बनाया और उसकी मदद से विक्रमजित को गद्दी से उतारने का षड़यंत्र रचा। वनवीर असाधारण वीर पृथ्वीराज का नाजायज पुत्र था ।


वनवीर ने अचानक विक्रमजित पर हमला किया। विक्रमजित अपनी आत्मरक्षा न कर पाया और मृत्यु को प्राप्त हुआ। यह देख उसके मित्र भाग खड़े हुए ।


शीघ्र ही राजा की मृत्यु का समाचार राजमहल में पहुँचा। राजमहल दुख में डूब गया। 


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पन्ना का त्याग : इंडियन हिस्ट्री स्टोरी हिंदी की कहानी को कॉमिक्स के रूप में पढ़ें 

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Panna Ka Tyag Indian History Story Hindi Comics Story

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..... Bhartiya Itihas Ki Hindi Kahani: Baji Prabhu .....


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Bhartiya Itihas KI Kahani: बाजी प्रभु | Baji Prabhu Hindi Story

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Baji Prabhu Ki Kahani

Bhartiya Itihas Ki Kahani: Baji Prabhu
भारतीय इतिहास की कहानी: बाजी प्रभु

बात 1660 की है। वीर शिवाजी दिल्‍ली के मुग़ल बादशाह तथा मुगल साम्राज्य के दूसरे सूबों के शासकों की बगल में छूरी बन बैठे थे।  

शिवाजी पन्हाला दुर्ग में रहा करते थे। शिवाजी और उस दुर्ग पर अधिकार करने के लिए बिजापुर के सुलतान ने सलाबत खाँ को थोड़ी फ़ौज के साथ भेजा। कई दिन तक फ़ौज दुर्ग को घेरे हुए थे।

एक दिन शिवाजी के अनुचर सफ़ेद झंडे लिये हुए दुर्ग के बाहर आये और सलाबत खाँ से पूछा- आप किन शर्तों पर दुर्ग पर से अपनी फौज को हटायेंगे !

उधर शिवाजी के अनुचर सलाबत खाँ से मंत्रणा कर रहे थे, तभी शिवाजी बूढ़ें का वेष धारण कर अपने कुछ साहसी अनुचरों के साथ दुर्ग के पीछे वाले द्वार से भाग गये। थोड़ी दूर पर उनके लिए घोड़े तैयार थे

जब शिवाजी तथा उनके अनुचर अपने वेश बदलकर घोड़ों पर सवार हुए, तब दुश्मन के एक गुप्तचर ने उन्हें देख लिया। फिर क्‍या था, सलाबत खाँ ने अपनी फ़ौज़ के साथ उनका पीछा किया।

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Baji Prabhu Bhartiya Itihas Ki Hindi Comics Story

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